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स्टेशन जैसी हो गयी है ज़िन्दगी, जहां लोग तो बहुत है, पर अपना कोई नह।
बारिश के बाद तार पर टंगी आख़री बूंद से पूछना, क्या होता है अकेला पन।
आपकी सम्मान वह वेतन है जिसे आपको लेना होगा, आपको चाहिए वह संघटना जो आपको चुने।
ज़िन्दगी में कुछ ज़ख्म ऐसे होते है जो कभी नहीं भरते बस इंसान उन्हें छुपाने का हुनर सीख जाता है
ऐसी बेरुखी भी देखी है हमने के लोग, आप से तुम तक तुम से जान तक, फिर जान से अनजान तक हो जाते ।
वो दिन नहीं वो रात नहीं वो पहले जैसे जज़्बात नहीं, होने को तो हो जाती है बात अब भी मगर इन बातों में वो बात नहीं।
खुद को सम्मान दीजिए, क्योंकि जब आप अपने आप में सम्मान करते हैं, तभी कोई दूसरा आपको सम्मान दे सकता है।
घुटन सी होने लगी है, इश्क़ जताते हुए, मैं खुद से रूठ गया हूँ, तुम्हे मनाते हुए।
आपके लिए आप ही सबसे महत्वपूर्ण हैं, अपना सम्मान रखें और अपने दौरों को उसी तरह बदलें जैसा आप स्वीकार करना चाहेंगे।
हुआ तो कुछ भी नहीं, बस थोड़े से ख्वाब टूटे हैं, और थोड़े से लोग बिछड़े ह।