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जब परिवार में स्वार्थ के विवाद हो जाता है, तो धीरे धीरे परिवार बिखर जाता है
कुछ सपने तुमने तोड़ दिए, बाकी हमने देखना छोड़ दिए
दिल में तेरी चाहत लबो पे तेरा नाम है, तू मोहब्बत कर या ना कर, मेरी ज़िन्दगी “तेरे नाम” है.
तुम्हें देखा तो मोहब्बत भी समझ आई, वरना इस लफ्ज़ की तारीफ सिर्फ ही सुना करता था मैं !
और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
मोहब्बत थी इसलिए जाने दिया जिद होती तो पलंग पर होती और पलंग चू चू कर रही होती.
उम्मीद छोड़ी हैं तुमसे मोहब्बत नहीं.
गलतफहमी बहुत थी के अपने बहुत है, आज मुड़कर पीछे देखा तो एक साया ही हमसफ़र निकला
रोटी तो हर कोई कमाता है लेकिन कुछ ही लोग रोटी परिवार के साथ बैठ कर खाते है
सोचो कितनी खूबसूरत होगी जिंदगी। जब दोस्त, मोहब्बत और हमसफ़र तीनो एक ही इंसान हो।