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प्रेम कोई सहूलियत का साधन नहीं है। यह खुद को मिटाने की एक प्रक्रिया है ।
अब वो नफरत में बदल गयी है।
ये वही लोग है जिन्हें प्यार में सिर्फ नफरत ही मिलती है।
केवल वे ही लोग, जो अपने दिमाग का कचरा किनारे रख सकते हैं, वास्तव में प्रेम और करुणा के काबिल होते हैं।
प्रेम जीवन है, घृणा मृत्यु है।
प्रेम एक समाहित करने की प्रक्रिया है। जब एक बार आपको मैं अपने एक अंश के रूप में शामिल कर लेता हूं, मैं आपके साथ वैसा ही होऊंगा, जैसा मैं खुद के साथ हूं। - सद्गुरु
दुनिया को नफरत का सुबूत नहीं देना पड़ता,
ज़िन्दगी बदलने के लिए लड़ना पड़ता हैं, और आसान करने के लिए समझना पड़ता हैं…
अब बात नफरत की है तो नफरत ही सही।
जहाँ सूर्य की किरण हो, वहीं प्रकाश होता है, और जहाँ प्रेम की भाषा हो, वहीं परिवार होता है।।