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आंखें खुली रखो तो आंसूं भी काले और बंद करू तो सपने भी

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हम आने वाले ग़म को खिंचतान कर आज की ख़ुशी पे ले आते है, और उस ख़ुशी में ज़हर घोल
प्यार हम दोनों ने किया मगर तड़पना सिर्फ मेरे नसीब
जिसका दिल ग़म की तन्हाइयों में उजड़ गया हो, वो बाहर से कितना ही सेहतमंद लगता हो
फ़रियाद कर रही है तरसी हुई निगाह, किसी को देखे हुए अरसा हो गया है।
दुःख तुमने मुझे नहीं दिया है मैंने अपने आप को
मुझे बहुत कुछ पढ़ना है, कुछ किताबें, कुछ लोग, कुछ आँखें.
सभी खुशहाल परिवार एक दुसरे से मिलते जुलते हैं, हर एक नाखुश परिवार अपने ही किसी कारण से
जब प्यार करने वाले अपने जज़्बातों को दबाकर रिश्तों को कोई दूसरा नाम देते है
खुद के बारें में न किसी पीर से पूछो न किसी फ़क़ीर से पूछो बस कुछ देर आँखें बंद करो, जो पूछना है अपने ज़मीर से पूछो।
हर दुःख आने वाले सुख की चिठ्ठी होती है, और हर नुक्सान होने वाले फायदे का