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कर्म का परम कर्तव्य अकर्म नहीं जाना।
हार और जीत सिक्के के दो पहलू की तरह होते हैं, पहले के बिना दूसरा और दूसरे के बिना पहला अधूरा होता है।
बिना कठोर परिश्रम सिर्फ परेशानियाँ बढ़ती है ख़ुशियाँ नहीं।
कर्म भूमी की दुनिया में, श्रम सभी को करना है.
सदैव अकेले खड़े होने का साहस कीजिए, दुनिया ज्ञान देती है, साथ नहीं
बिना दुख के सुख की कोई अहमियत नहीं होती इसलिए दुख से कभी घबराओ मत।
भाई, रक्षा बंधन की शुभकामनाएं! ये राखी आपको सुरक्षित रखे और आपकी ज़िंदगी में सुख-शांति लाए।
मनुष्य कितना भी गोरा क्यों ना हो परंतु उसकी परछाई सदैव काली होती है…!! “मैं श्रेष्ठ हूँ” यह आत्मविश्वास है लेकिन…. “सिर्फ मैं ही श्रेष्ठ हूँ” यह अहंकार है
पढ़ाई जितनी आसान लगती है उतनी ही कठिन होती है। हर छात्र को चाहिए कि वह मन लगाकर अपने पथ पर अग्रसर रहे।
हर दुःख आने वाले सुख की चिठ्ठी होती है, और हर नुक्सान होने वाले फायदे का