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हर फैसला मेरा बेहतर था सिवाए ज़िन्दगी में तेरे आने के।
ज़िन्दगी एक ढलती शाम की तरह है, जिसमें कहीं उथल-पुथल है, तो कहीं थोड़ा आराम भी
जो मुझे रोज़ देखता है उसकी ईनायत देखनी है खुदा के पास पहुंच अपनी हैसियत कहनी है।
जीत की उम्मीद रखते हो बहाने बनाके चलने का शौक है क्या।
कुछ ऐसा काम करना है जैसे मुठ्ठी में रेत पकड़ लेना।
सपने देख लेना पर पूरा करने कि हिम्मत भी रखना।
ज़िन्दगी में सदा ही हौसले बड़ा रखना चाहिए. ख़ुशी हो या ग़म, हमेशा मुस्कुराना चाहिए.
सही फैसले लेने वाले कभी मुड़कर नहीं देखते, बस आगे बढ़ते जाते हैं।
ज़िन्दगी में एक हसी वो होती है जो इंसान अपने ग़म को छुपाने के लिए खुद सीखता है
स्टेशन जैसी हो गयी है ज़िन्दगी, जहां लोग तो बहुत है, पर अपना कोई नह।