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ज़िन्दगी एक ढलती शाम की तरह है, जिसमें कहीं उथल-पुथल है, तो कहीं थोड़ा आराम भी।

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जितना_मैंने सोचा था ज़िन्दगी उससे कहीं_छोटी है !
एक तुम जो मुस्कुराते हो तो, ज़िन्दगी, ज़िन्दगी सी लगती है
ना कोई तरंग है, ना कोई उमंग है मेरी ज़िन्दगी भी क्या एक कटी पतंग
दिल में तेरी चाहत लबो पे तेरा नाम है, तू मोहब्बत कर या ना कर, मेरी ज़िन्दगी “तेरे नाम” है.
जब दूसरे सो रहे हों, आप काम/पढ़ाई करो. . जो उनके सपने हैं, वो ज़िन्दगी आप जियोगे
लेकिन नकारात्मकता के साथ खड़े होने पर, ज़िन्दगी भर गलत ही गलत होगा।
जो लोग सपनों को सच करते हैं, वहीं ज़िन्दगी का सही अर्थ समझते हैं।
मैं ज़िन्दगी से नहीं, अपने आप से नाराज़ हूँ – अर्जुन
आशाओं के दीपक ही जीवन में अंधकार को मिटाते हैं।
ज़िन्दगी में अगर गुलाब की तरह खिलना है तो कांटों से तालमेल की कला को सीखना ही होगा.