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घायल तो यहां हर परिंदा है
तरक्कियों की दौड़ में उसी का जोर चल गया बना के रास्ता जो भीड़ से निकल
कामयाब होने के लिए अकेले ही आगे बढ़ना पड़ता है
जिस काम में काम करने की हद पार ना फिर वो काम किसी काम का
जमाने में वही लोग हम पर उंगली उठाते हैं जिनकी हमें छूने की औकात नहीं
जो रातों को कोशिशों में गंवा देते हैं, वहीं सपनों की चिंगारी को और हवा
कभी कभी किसी की जुनून को देख कर अपने आप में भी जुनून आ जाता
एक दिन वर्षों का संघर्ष बहुत खूबसूरत तरीके से तुमसे
जब रास्तों पर चलते चलते मंजिल का ख्याल ना आये तो आप सही रास्ते
जिस जिस पर यह जग हंसा है, उसी ने इतिहास रचा