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अब मत खोलना, मेरी ज़िन्दगी की पुरानी किताबो को, जो था वो मैं रहा नहीं, जो हूँ वो किसी को पता नहीं

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हर फैसला मेरा बेहतर था सिवाए ज़िन्दगी में तेरे आने के।
ज़िन्दगी एक ढलती शाम की तरह है, जिसमें कहीं उथल-पुथल है, तो कहीं थोड़ा आराम भी
ना कोई तरंग है, ना कोई उमंग है मेरी ज़िन्दगी भी क्या एक कटी पतंग
यह मेरी ज़िन्दगी है, बिन्दास जी रहा हूँ, जलने वालों को और जला रहा हूँ।
लेकिन नकारात्मकता के साथ खड़े होने पर, ज़िन्दगी भर गलत ही गलत होगा।
ज़िन्दगी में अगर गुलाब की तरह खिलना है तो कांटों से तालमेल की कला को सीखना ही होगा.
कलह पर विजय पाने के लिए, मौन से बड़ा कोई शस्त्र नहीं है.
यादें ही तो ज़िन्दगी का खज़ाना हैं. बाकी तो सबको खली हाथ ही जाना हैं…
ज़िन्दगी परेशान करेगी, कभी दुख से, कभी संघर्ष से, कभी किस्मत से, पर एक चीज तुम्हें आगे बढ़ाएगी, वह है मेहनत।
याद रहे ये ज़िन्दगी तुम्हें हारने का मौका तब तक नहीं देगी, जब तक तुम खुद न हार मान लो।