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लेकिन नकारात्मकता के साथ खड़े होने पर, ज़िन्दगी भर गलत ही गलत होगा।
आंखें खुली रखो तो आंसूं भी काले और बंद करू तो सपने भी
ज़िन्दगी एक ढलती शाम की तरह है, जिसमें कहीं उथल-पुथल है, तो कहीं थोड़ा आराम भी।
ज़िन्दगी में एक हसी वो होती है जो इंसान अपने ग़म को छुपाने के लिए खुद सीखता है
अगर जिंदगी में कुछ पाना हो तो, अपने तरीके बदलो, इरादे नही।
व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है,
अपने सपनों का पीछा करो, न कि अपने समय का। सपने खुद आपके पास आएंगे और समय भी आपके पास होगा।
स्टेशन जैसी हो गयी है ज़िन्दगी, जहां लोग तो बहुत है, पर अपना कोई नह।
प्यार हम दोनों ने किया मगर तड़पना सिर्फ मेरे नसीब
‘जिन्दगी’ का कोई रिमोट नहीं होता, उठो जागो और खुद बदलो