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डट कर करना सामना तुम मुश्किलों का, एक दिन वक्त भी तुम्हारा गुलाम होगा
गलत और गुस्से में लिया गया निर्णय इंसान को कभी कोई ख़ुशी नहीं देता, ऐसे निर्णय इंसान तभी लेता है जब उसे, उसकी ज़िंदगी में सही विचार, नई सोच देनेवाला नहीं होता ,और वह खुद सही करने का प्रयास नही करता,
भूल होना प्रकृति है, मान लेना संस्कृति है, और सुधार लेना प्रगति है!
जीवन लम्बा होने की बजाये, महान होना चाहिए!
अंधेरे को कोसने से बेहतर है की एक दिया जलाया जाए!
आज के समय, लोग अपने ज़िंदगी के तकलीफो, समस्याओ में कुछ इस तरह उलझे है, की उन्हें अपनी ज़िदगी के सही निर्णय लेने की समझ ही नहीं रही|
जीवन में अगर कोई आपके किये हुए कार्य की तारीफ़ न करे तो चिंता मत करना, क्यूंकि आप उस दुनिया में रहते है, जहाँ जलता तो तेल और बाती है पर लोग कहते है की दिपक जल रहे है!
एक व्यक्ति द्वारा स्वामी विवेकानंद से पूछा गया, सब कुछ खोने से ज्यादा बुरा क्या है ? स्वामी जी ने उत्तर दिया की “वो ऊमीद खोना जिसके भरोसे पर हम सब कुछ वापस पा सकते है!
न कर फ़िक्र की जमाना क्या सोचेगा, ज़माने को अपनी ही फ़िक्र से फुरसत कहाँ!
खुद को समय जरुर दे, आपकी पहली जरुरत खुद आप है!