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ख़ुशी, शांति और प्रेम – ये कोई आध्यात्मिक लक्ष्य नहीं हैं। यह सब तो समझदारीपूर्वक जीने की शुरुआत है ।
दो पल ठहर के मेरे पास वह आया पूछा मिली थी जो खुशी उसे क्यों ठुकराया
हर सुबह उठो और खुद से कहो, आज का दिन मेरा दिन है।
गुज़र जायेगा ये दौर भी ज़रा सब्र तो रख, जब खुशियाँ ही न रुकी तो ग़म की क्या औकात है!
छोटी छोटी चीज़ों मे ख़ुशी ढूँढना सीखो, ज़िंदगी के कठिन समय मे भी मुस्कुराना सीखो।
अपनी ख़ुशी की जिम्मेदारी आप खुद सम्भालो, इसको किसी दूसरे के हाथो में मत जाने दो।
सुंदर सा रिश्ता तुम्हारा-मेरा, जहां रहे सिर्फ खुशियों का पहरा।
केवल सुख और दुःख के जरिये ही कोई व्यक्ति खुद के और अपने नसीब के बारे में जान पाता है। वे सीखते है कि क्या करना है और क्या नहीं - जोहान वोल्फगांग वों गेटे
हम आने वाले ग़म को खिंचतान कर आज की ख़ुशी पे ले आते है, और उस ख़ुशी में ज़हर घोल
चाकू की धार से अधिक मोटा कुछ भी खुशी को उदासी से अलग नहीं कर सकता। – Virginia Woolf