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ख़ुशी, शांति और प्रेम – ये कोई आध्यात्मिक लक्ष्य नहीं हैं। यह सब तो समझदारीपूर्वक जीने की शुरुआत है ।
हम आने वाले ग़म को खिंचतान कर आज की ख़ुशी पे ले आते है, और उस ख़ुशी में ज़हर घोल
मूल रूप में, प्रेम का अर्थ हैः पसंदों और नापसंदों से ऊपर उठ जाना।
जो हम खुशी से सीखते हैं उसे कभी नहीं भूलते।
मैं बेचैन सा लगता हूं वो राहत जैसी लगती हैं मैं खो जाता हूं ख्वाबों में वो भीतर मेरे जगती हैं !
छोटी छोटी चीज़ों मे ख़ुशी ढूँढना सीखो, ज़िंदगी के कठिन समय मे भी मुस्कुराना सीखो।
खुश रहा करो उनके लिए जो अपनी खुशी से ज्यादा आपको खुश देखना चाहते है।
जिन लोगों ने जीवन का अनुभव किया है उन्हें कभी खुशी नहीं मिली।
जो भी शर्तों पर आधारित है, वह प्रेम नहीं है।
अपने प्रेम, अपनी खुशी और अपने उल्लास को रोककर मत रखें। आप जो देते हैं, वही आपका गुण बन जाता है, न कि वह जो आप रोक कर उल्लास हैं।