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तेरी यादों के सहारे जीना सिख लिया है, सिरहाने के तकिया का सहारा लिया है
गुजर जाएगा ये दौर भी ज़रा सा सब्र तो रख, जब खुशियों ही नहीं रुकी तो गम की क्या औकात है
कुछ लोग डायरी इसलिए लिखते है, क्योंकि उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं होता
वो एक रोज सारी खुशियाँ लेकर लौट आएगी, इस उम्मीद को लेकर बहाल रही है जिंदगी
दर्द तब और भी गहरा होता है जब, हमें अपने ही लोगो से धोखा मिलता है
हर ठोकर इस बात की चेतावनी देती है, की अब संभाल जाओ
आंसूं किसी के दुःख को समझता नहीं है, और न ही किसी की ख़ुशी को
बड़ा सोचो, जल्दी सोचो ,आगे सोचो विचारों पर किसी का अधिकार नहीं है” – धीरूभाई अंबानी
मैंने कुछ वक्त चुप रहकर भी देख लिया, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता
चहरे बदल जाए तो कोई तकलीफ नहीं, मगर लहजे बदल जाए तो बहुत तकलीफ होती है