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अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए

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ज़िंदगी” की “तपिश” को “सहन” किजिए “जनाब”, अक्सर वे “पौधे” “मुरझा” जाते हैं, जिनकी “परवरिश” “छाया” में होती हैं।
जिंदगी में अगर अच्छे दोस्त हों, तो इससे खूबसूरत और कुछ नहीं हो सकता।
इंसान का सारा ध्यान आज बस इस बात पर है कि ज़िंदगी जीने के तरीकों में कैसे सुधार किया जाए।
कभी अंदाज से तो कभी नजरअंदाज से, जिंदगी जिएं जनाब अपने अलग अंदाज से।
जिंदगी की दास्तान बदलती रहती है, हर दिन नई चुनौतियाँ, हर दिन नया सफर।
बस खुश रहना सीख लीजिए, जिंदगी अपने आप खूबसूरत हो जाएगी।
ज़िंदगी में कभी खुद से तो कभी सब से लड़ना पड़ता है ज़िंदगी क्या है, इस सवाल को पहले समझना पड़ता है।
मेरी जिंदगी एक बंद किताब है, जिसे आज तक किसी ने खोला नहीं, जिसने खोला उसने पढा नही, जिसने पढा उसने समझा नही
ज़िंदगी जो देदे ख़ुशी से ले लेना चाहिए , मगर बदले में जो आपसे बन सके उसे देते रहना चाहिए।
जरूरी नहीं कि सारे सबक किताबों से ही सीखें जाते है, कुछ सबक जिंदगी और रिश्ते भी