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भगवान सिर्फ उन्हीं की सहायता करता है जो लोग खुद अपनी सहायता स्वयं करते हैं।– स्वामी विवेकानंद
जिस व्यक्ति के अंदर स्वयं को खोने का डर नहीं है, जो इससे मुक्त हो चुका है, वही प्रेम को जान सकता है, वही प्रेम बन सकता है ।
सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर
मुश्किलें सिर्फ परीक्षा होती हैं, सफलता के लिए तैयार हो जाओ।
आप प्रेम में खड़े नहीं हो सकते, आप प्रेम में चढ़ नहीं सकते, आप प्रेम में उड़ नहीं सकते - आप प्रेम में सिर्फ डूब सकते हैं।
वासना एक ज़बरदस्त ज़रूरत है; प्रेम कोई ज़रूरत नहीं है। जब आप प्रेम करते हैं, तब आप तृप्त हो जाते हैं, और किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं रहती। प्रेम में, आप बस यहाँ बैठकर अपना पूरा जीवन बिता सकते हैं।
समझ लेना तुम मुझे मेरे बिना कहे खामोशी समझना भी प्रेम ही है
जहाँ सूर्य की किरण हो, वहीं प्रकाश होता है, और जहाँ प्रेम की भाषा हो, वहीं परिवार होता है।।
प्रेम कोई सहूलियत का साधन नहीं है। यह खुद को मिटाने की एक प्रक्रिया है ।
अगर आप उड़ नहीं सकते तो दौडि़ये, अगर दौड़ नहीं सकते तो चलिए और अगर चल भी नहीं सकते तो रेंगिए, जो कुछ भी कीजिए लेकिन आपको सिर्फ आगे ही बढ़ना है ।