#Quote

एक पर्व ही बताता है कि ख्याल कितना है, वरना कोई तराजू नहीं होता रिश्तों में।

Facebook
Twitter
More Quotes
दिल में कुछ जलता है, शायद दुआ धुआ सा लगता है। आंख में कुछ अच्छा है, शायद सपना कोई सुलगता है।
सारी उम्र गुज़री यूं ही रिश्तों की तुरपाई में, मन के रिश्ते पक्के निकले, बाकि उधड़ गए कच्ची सिलाई में
सभी की खुशियों का ख्याल रखते-रखते हम बड़े हो जाते हैं फिर एक दिन अचानक ही अपनी खुशी गायब हम पाते हैं।
वक़्त कट तो भी नहीं, वक़्त रुकता भी नहीं। दिल है सजदे में मगर, इश्क झुकता भी नहीं।
झूठे तेरे वादों पे बरस बिताये। जिंदगी तो काटी, ये रात कट जाए।
अपने रिश्तो को उस ताले की तरह बनाओ जिसे हथोड़े की चोट तो मंजूर हो, मगर किसी दूसरी चाबी से खुलना मंजूर नहीं.
पतझड़ में ही रिश्तों की परख होती है, बारिश में तो हर पत्ता हरा ही दिखता है
परिवर्तन कभी आसान नहीं होता, लेकिन हमेशा संभव होता है।
मैं हर रात की ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता, हुन मगर रोज सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती हैं.
ज़िंदगी की लंबाई नहीं, बल्कि गहराई मायने रखती है।