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वक़्त कट तो भी नहीं, वक़्त रुकता भी नहीं। दिल है सजदे में मगर, इश्क झुकता भी नहीं।

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इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के
पर वक़्त बीत रहा है कागज के टुकड़े कमाने के लिए।
वक़्त कट तो भी नहीं, वक़्त रुकता भी नहीं। दिल है सजदे में मगर, इश्क झुकता भी नहीं
किसी का इतना भी केयर और वैल्यू मत करो। की उसे तुम्हारे कीमती ‘वक्त’ की कदर ही ना रहे।
वक्त से पहले मिली चीजें अपना मूल्य खो देती है और वक्त के बाद मिली चीजे अपना महत्व।
तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं। रात भी आई थी, और चांद भी था। हाँ मगर नींद नहीं।
कितना भी पकड़ो फिसलता जरूर है, ये वक्त है साहब बदलता जरूर है।
मिली थी जिंदगी किसी के काम आने के लिए, पर वक़्त बीत रहा है कागज के टुकड़े कमाने के लिए।
छुपा रहा हूं इश्क अभी सबसे पर एक दिन सरेआम तुम्हें लेने आऊंगा
थोड़ा है, थोड़ी की जरूरत है। जिंदगी फिर भी यहां खूबसूरत है।