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दो पल ठहर के मेरे पास वह आया पूछा मिली थी जो खुशी उसे क्यों ठुकराया

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गुज़र जायेगा ये दौर भी ज़रा सब्र तो रख, जब खुशियाँ ही न रुकी तो ग़म की क्या औकात है!
मेरी हंसी-मेरी खुशी की इकलौती वजह तुम ही हो नारित्व की पहचान हो तुम, मेरे सम्मान की वजह तुम ही हो -- मयंक विश्नोई
जो हम खुशी से सीखते हैं उसे हम कभी नहीं भूलते। — अल्फ्रेड मर्सिएर
कभी भी मुस्कुराना बंद न करें, भले ही आप दुखी हों, हो सकता हैं की आपकी मुस्कुराहट दूसरो की खुशी का कारण हो।
जवाब सुनकर वह भी रोने लगा कहीं ना कहीं मेरे दर्द में खोने लगा
हम आने वाले ग़म को खिंचतान कर आज की ख़ुशी पे ले आते है, और उस ख़ुशी में ज़हर घोल
दूसरों को जलाने से पहले खुद जलती है माचिस की तीली, वो जिंदगी ही क्या जिसने सुख-दुख के साथ आंख-मिचौली न खेली।
जिन्दगी जिन्हें ख़ुशी नहीं देती, उन्हें तजुर्बे बहुत देती है !
अपने प्यार, अपनी ख़ुशी और अपनी ख़ुशी को रोकें नहीं। आप जो देते हैं वह आपका गुण बन जाता है, न कि वह जो आप रोकते हैं।
रूह तक कांप जाती है, तेरे ना होने के ख्याल को सोचकर ही,