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प्रेम कोई ऐसी चीज नहीं हैए जो आप करते हैंए बल्कि जो आप स्वयं हैं।
ज्यादातर लोगों के लिए, प्रेम का मतलब होता है, ‘तुम्हें वही करना चाहिए, जो मैं चाहता हूं।’ नहीं, प्रेम का असली मतलब है कि वे जो चाहें कर सकते हैं, और हम फिर भी उन्हें प्रेम करते हैं।
आप प्रेम में खड़े नहीं हो सकते, आप प्रेम में चढ़ नहीं सकते, आप प्रेम में उड़ नहीं सकते - आप प्रेम में सिर्फ डूब सकते हैं ।
जो इंसान सही और गलत, पसंद और नापसंद के दायरे में ही फंसा हुआ है, वह प्रेम के तानेबाने को कभी नहीं जान पाएगा।
प्रेम कोई सहूलियत का साधन नहीं है। यह खुद को मिटाने की एक प्रक्रिया है।
समझ लेना तुम मुझे मेरे बिना कहे खामोशी समझना भी प्रेम ही है
निपुणता हमेशा आपके आसपास के लोगों के प्रति आपके प्रेम और परवाह का नतीजा होनी चाहिए - न कि एक मशीनी और उदासीन कार्य-भावना का।
जिस व्यक्ति के अंदर स्वयं को खोने का डर नहीं है, जो इससे मुक्त हो चुका है, वही प्रेम को जान सकता है, वही प्रेम बन सकता है ।
आप प्रेम में खड़े नहीं हो सकते, आप प्रेम में चढ़ नहीं सकते, आप प्रेम में उड़ नहीं सकते - आप प्रेम में सिर्फ डूब सकते हैं।
प्रेम कोई सहूलियत का साधन नहीं है। यह खुद को मिटाने की एक प्रक्रिया है ।