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ईश्वर या कोई और आपसे प्यार करता है या नहीं, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आपका स्वयं का प्रेमपूर्ण होना ही आपके जीवन को सुखद व मीठा बनाता है।

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योग एक जबरदस्त प्रेम प्रसंग है। यह जीवन के हर रूप और हर आयाम को शामिल करने की प्रक्रिया है।
अपने प्यार को बड़ा बनाइये। केवल एक ही व्यक्ति से प्यार क्यों करें, जब आप सारे ब्रह्मांड के साथ प्यार कर सकते हैं?
दुनिया के 7.5 अरब लोगों में से अपने आपको निकाल कर, अगर आप बहुत अकेलापन महसूस करते हैं तो ये प्यार नहीं है, मोह है।
मोहब्बत थी इसलिए जाने दिया जिद होती तो पलंग पर होती और पलंग चू चू कर रही होती.
वासना एक ज़बरदस्त ज़रूरत है; प्रेम कोई ज़रूरत नहीं है। जब आप प्रेम करते हैं, तब आप तृप्त हो जाते हैं, और किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं रहती। प्रेम में, आप बस यहाँ बैठकर अपना पूरा जीवन बिता सकते हैं।
जिन लोगों को प्यार नहीं मिलता, सिर्फ वो ही ऐसी कल्पना करते हैं कि ईश्वर प्रेम है। प्यार तो एक मानवीय भावना है।
ईश्वर से कोई भी प्रेम कर सकता है क्योंकि वह आपसे कुछ नहीं मांगता। पर अपने पास खड़े व्यक्ति से प्रेम करने की कीमत जीवन से चुकानी पड़ती है ।
तर्क से परे एक आयाम है। जब तक आप वहां नहीं पहुंच जाते, आप ना तो प्रेम की मधुरता, ना ही ईश्वर को जान पाएंगे ।
तर्क से परे भी एक जगह है। जब तक आप वहां नहीं पहुंचते, आप न तो प्रेम की मिठास को जान पाएंगे और न ही ईश्वर को।
आप प्रेम में ऊंचे नहीं उठ सकते, आप प्रेम में उड़ नहीं सकते, आप प्रेम में खड़े नहीं हो सकते – आपको लव (प्रेम) में फॉल करना (गिरना) होगा। अगर आप भावनाओं के जादू को जानना चाहते हैं, तो आपके कुछ अंश को फॉल करना (गिरना) होगा।