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ज़माना बड़े शौक़ से सुन रहा थाहमीं सो गए दास्तां कहते-कहते
मैं हमेशा डरता था उसे खोने से ! उसने ये डर ही ख़त्म कर दिया मुझे छोड़कर.
हुस्न वाले जब तोड़ते हैं दिल किसी का ! बड़ी मासूमियत से कहते हैं मजबूर थे हम.
ज़रा सी वक़्त ने करवट क्या ली ! गैरों की लाइन में सबसे आगे अपनों को पाया हमने.
इन फासलों के पीछे सब फैसले तुम्हारे थे.
जो कभी ना भर पाए ऐसा भी एक घाव है, जी हां उसका नाम लगाव है
लोग कहते हैं हमसे तुम बहुत बदल गए हो ! तो अब क्या टूटे हुए पत्ते रंग भी न बदलें.
जिंदगी रेल सी गुजर रही हैं, उम्मीदे स्टेशन सी छूट रहीं हैं.
अभी धूप निकलने के बाद भी जो सोया है ! वो ज़रूर तेरी याद में रातभर रोया है.
पंछी जब अपने पंखों पर विश्वाश करता है,तो सारा आसमान उसी का हो जाता है,अपनी मेहनत पर विश्वाश कीजिये, एक दिन हर तरफ केवल आपका ही नाम होगा।