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तुम संघर्ष के समय बनी ऐसी प्रतिमा हो बहना, जिसे न्याय की मूर्ति कहना गलत ना होगा।

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जो है जैसा-वैसी तुम हो, कहीं सख्त-कहीं मुलायम सी बहन तुम्हें सदा लाड मिलेगा, मैं करूंगा तुम्हारी हिफाज़त भी -- मयंक विश्नोई
मेरे भीतर पनपे विश्वास की जड़ तुम हो बहना, मेरी जीत का एकलौता श्रेय तुम हो बहना
बोलो बहन कैसे कह दूँ कि मैं तुम्हारे बिना सभ्य हुआ, वास्तविकता तो यही है कि तुमसे ही सभ्यताओं का सृजन हुआ है।
तुम संघर्ष के समय बनी ऐसी प्रतिमा हो बहना, जिसे न्याय की मूर्ति कहना गलत ना होगा ।
ईमानदारी की इच्छाओं पर अडिग रहना तुम्हीं से सीखा है बहन तुम्हारे कदमों के निशान पर, मैंने मेरे वजूद को सींचा है -- मयंक विश्नोई
जो मैं जलते चिराग में पड़ा तेल हूँ, तो सच यह है कि बहना तुम उस चिराग में जलती बाती हो।
ऋतुओं की चादर ओढ़कर तुमने ही मुझे जीना सिखाया बहन तुम्हारी ममता ने सादगी का अमृत पीना सिखाया -- मयंक विश्नोई
हर रक्षा बंधन मैं अपने मन के भीतर तुम्हारी सुख, समृद्धि का संकल्प लेता हूँ।
तुम पवित्रता की प्रतिमा हो, बहना तुम परिवर्तन की प्रतिभा हो।
जीवन में एक लक्ष्य के प्रति समर्पित होना कुछ इस प्रकार है कि संघर्षों के पथ पर सफलता के लिए साहासिक कदम उठाना।