#Quote

कितने अजीब हैं ये जमाने के लोग, खिलौना छोड़ कर जज़बातों से खेलते है।

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समय अच्छा हो तो आपकी गलती भी मजाक लगती है, समय खराब हो तो मजाक भी गलती बन जाती है।
अजीब फितरत है लोगों की, अपनी गलती पर वकील बनते हैं और दूसरे की गलती पर जज बनते हैं!
पाप निःसंदेह बुरा है; लेकिन उससे भी बुरा है पुन्य का अहंकार।
कुछ अलग करना हो तो भीड़ से हट के चलिए, भीड़ साहस तो देती है, मगर पहचान छिन लेती है।
कितना अजीब भ्रम है ये मानना कि सुन्दरता अच्छाई है
जो तुमसे तंग आ जाए उसे छोड़ दो, क्योंकि बोझ बन जाने से याद बन जाना बेहतर है..
यादें ही तो ज़िन्दगी का खज़ाना हैं. बाकी तो सबको खली हाथ ही जाना हैं…
कितना अजीब भ्रम है ये मानना कि सुन्दरता
सबसे शक्तिशाली पद हासिल उतना कठिन नहीं होता जितना उस पर बने रहना होता हैं.
कुछ लोगों को ऊँचाई पर पहुंचने की इतनी जल्दी होती है की छोटे लोगों के हाथ पकड़ने की बजाय बड़े लोगों के पाँव पकड़ना पसंद करते है।