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मेरे ग़म का छोटा सा हिस्सा लेकर तो देखो , मरने की ख्वाहिश न करने लगे तो कहना

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नाज़ुक लगते थे जो लोग, वास्ता पड़ा तो पत्थर के निकले
दर्द, गम, डर जो भी है बस तेरे अंदर हैं, खुद के बनाये पिंजरे से निकल कर देख, तू भी एक सिकंदर हैं
सूरज और चांद की ख्वाहिश नहीं मुझे जहां दिल को सुकून मिले वहीं मेरे खुदा का दर है।
जो चीज़ किसी ने मेहनत से हासिल की हो, वो आप अपनी ख्वाहिश से हासिल नहीं कर सकते…
एक ख्वाहिश थी के जिंदगी तेरे साथ गुजरे, एक ख्वाहिश है कि तुमसे अब उम्र भर सामना ना हो
हर छोटा बदलाव बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है!
मेरी रब से एक गुज़ारिश है, छोटी सी लगानी एक सिफारिश है, रहे जीवन भर खुश मेरे पापा, बस इतनी सी मेरी ख्वाहिश है।
दर्द, गम, डर जो भी है बस तेरे अंदर हैं, खुद के बनाये पिंजरे से निकल कर देख, तू भी एक सिकंदर है!
हर आदमी के अपने गुप्त दुख होते हैं जिन्हें दुनिया नहीं जानती; और कई बार हम किसी आदमी को कठोर समझते हैं जब वह केवल उदास होता है।
किसी को उजाड़ कर बसे तो क्या बसे किसी को रुलाकर हँसे तो क्या हँसे