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चाकू की धार से अधिक मोटा कुछ भी खुशी को उदासी से अलग नहीं कर सकता। – Virginia Woolf

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ऐ ज़िंदगी, आज तूने भी हमे अनदेखा कर दिया। हम खुशियो का इंतज़ार करते रह गए, और तूने हमे गमो मे ढकेल दिया।
नाज़ुक लगते थे जो लोग, वास्ता पड़ा तो पत्थर के निकले
किसी को उजाड़ कर बसे तो क्या बसे किसी को रुलाकर हँसे तो क्या हँसे
दूसरों को जलाने से पहले खुद जलती है माचिस की तीली, वो जिंदगी ही क्या जिसने सुख-दुख के साथ आंख-मिचौली न खेली।
तुम्हारे खुशियों के ठिकाने बहुत होंगे, मगर हमारी बेचैनियों की वजह तो बस तुम हो!
महान लोगों के शैक्षिक उद्धरण हमें बुद्धिमान सबक सिखाते हैं, लेकिन हर किसी के जीवन में एक या अधिक नायक होते हैं जिन्हें वे अपना मार्गदर्शक मानते हैं।
ख़ुशी, शांति और प्रेम – ये कोई आध्यात्मिक लक्ष्य नहीं हैं। यह सब तो समझदारीपूर्वक जीने की शुरुआत है ।
भाई से हर खुशियां मिलती हैं और भाई के बगैर जीवन आधा है।
हर आदमी के अपने गुप्त दुख होते हैं जिन्हें दुनिया नहीं जानती; और कई बार हम किसी आदमी को कठोर समझते हैं जब वह केवल उदास होता है।
ख़ुशी, शांति और प्रेम – ये कोई आध्यात्मिक लक्ष्य नहीं हैं। यह सब तो समझदारीपूर्वक जीने की शुरुआत है।