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अगर तुम्हारी अना ही का है सवाल तो फिर चलो मैं हाथ बढ़ाता हूँ दोस्ती के लिए
जो लोग छोटी सी बात पर भी अपनी आँखों के नीर को नहीं रोक पाते, वास्तव में वह लोग दिल के बड़े सच्चे होते हैं|
पर वक़्त बीत रहा है कागज के टुकड़े कमाने के लिए।
दोस्ती ख़्वाब है और ख़्वाब की ता’बीर भी है रिश्ता-ए-इश्क़ भी है याद की ज़ंजीर भी
ज़िन्दगी एक ढलती शाम की तरह है जिसमें कहीं उथल-पुथल है, तो कहीं थोड़ा आराम भी।
लगातार चलने का नाम ज़िन्दगी है, रुकने-थकने या हार जाने का नहीं। सोने से तो बस नींद पूरा होती है, सपनों को पूरा करने के लिए तो जागना पड़ता है.
ज़िन्दगी जीना है तो पीछे मुड़कर मत देखना।
दोस्ती में भी उतार चढाव होते हैं। आपके मन अलग होते हैं, कभी कभी आप दोनों अलग हो जाते हैं, लेकिन फिर वापस एक साथ हो जाते हैं। यही तो दोस्ती हैं।
ज़िन्दगी एक ढलती शाम की तरह है, जिसमें कहीं उथल-पुथल है, तो कहीं थोड़ा आराम भी
जिंदगी की सबसे बड़ी सीख, बदलाव में ही छुपा होता है।