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इस दिन हर कोई अपने पिता को स्पेशल फील करवाना चाहता
शुद्ध विचार किसी भी जहर से नहीं मरते, और अशुद्ध विचार किसी भी दवा से नहीं रुक
पापा के लिए दो लाइन
मुझे रख दिया छांव में, खुद जलते रहे धूप में, मैंने देखा है ऐसा एक फरिश्ता, अपने पिता के रूप में।
न जाने किस दरबार का चिराग़ हूँ मैं , जिसका दिल करता है जलाकर छोड़ देता है
बेटे की ओर से पिता के लिए विचार
मेरे पास भाई जैसा भगवान का वो अनमोल तोहफा है, जो इस दुनिया में हर किसी के पास नहीं होता है।
चुपके से एक दिन रख आऊं, सभी खुशियां उनके सिरहाने में, जिन्होंने एक अरसा बिता दिया, मुझे बेहतर इंसान बनाने में।
अजीज भी वो है, नसीब भी वो है, दुनिया की भीड़ में करीब भी वो हे, उनकी दुआओं से ही चलती है जिंदगी, क्योंकि खुदा भी वो है, तकदीर भी वो है।
पिता और बेटी पर हिंदी में शायरी