#Hindi Quote

ऋतुओं की चादर ओढ़कर तुमने ही मुझे जीना सिखाया बहन तुम्हारी ममता ने सादगी का अमृत पीना सिखाया -- मयंक विश्नोई

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तुम संघर्ष के समय बनी ऐसी प्रतिमा हो बहना, जिसे न्याय की मूर्ति कहना गलत ना होगा।
वो किताबों में लिखा नहीं था , जो सबक़ ज़िन्दगी ने सिखाया मुझे !
हर रक्षा बंधन मैं अपने मन के भीतर तुम्हारी सुख, समृद्धि का संकल्प लेता हूँ।
बोलो बहन कैसे कह दूँ कि मैं तुम्हारे बिना सभ्य हुआ, वास्तविकता तो यही है कि तुमसे ही सभ्यताओं का सृजन हुआ है।
तेरे होने से ही मेरे घर परिवार में खुशियां हैं क्योंकि बहना तू मुझे मिला खुशियों का वरदान है।
मेरे भीतर पनपे विश्वास की जड़ तुम हो बहना, मेरी जीत का एकलौता श्रेय तुम हो बहना
ईमानदारी की इच्छाओं पर अडिग रहना तुम्हीं से सीखा है बहन तुम्हारे कदमों के निशान पर, मैंने मेरे वजूद को सींचा है -- मयंक विश्नोई
बहना मेरी हर सुबह की भोर हो तुम, हर सवालों का जवाब और मेरे मन में उठा शोर हो तुम
माँ की ममता भी हैं तुझमें, है तुझमें पिता सा अकड़पन भी दोस्ती भी अनमोल है तेरी, अनमोल है तेरा लड़कपन भी
मेरी हंसी-मेरी खुशी की इकलौती वजह तुम ही हो नारित्व की पहचान हो तुम, मेरे सम्मान की वजह तुम ही हो -- मयंक विश्नोई