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तरक्कियों की दौड़ में उसी का जोर चल गया बना के रास्ता जो भीड़ से निकल गया।

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तरक्कियों की दौड़ में उसी का जोर चल गया बना के रास्ता जो भीड़ से निकल
ज़िंदगी का सफ़र मानो तो मौज है वरना समस्या तो रोज है।
तरक्कियों की दौड़ में उसी का जोर चल गया, बना के रास्ता जो भीड़ से निकल गया। ज़िंदगी का सफ़र मानो तो मौज है वरना समस्या तो रोज
भाग्य (नियति) हमें दो तरह से तोडता है – हमारी इच्छाओं को अस्वीकार करके और उन्हें पूरा करके - हेनरी फ्रेडरिक एमिल
मिसाल क़ायम करने के लिए, अपना रास्ता स्वयं बनाना होता है।
वो ढूँढ रहे थे मुझे भूल जाने के तरीके, मैंने उनसे खफा होकर उनकी मुश्किल आसान कर दी।
तरक्कियों की दौड़ में उसी का जोर चल गया
जिस काम में काम करने की हद पार ना फिर वो काम किसी कामका नहीं।
घायल तो यहां हर परिंदा है, मगर जो फिर से उड़ सका वहीं जिंदा है
मंजिलें क्या है, रास्ता क्या है?, हौसला हो तो फासला क्या है