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सभी खुशहाल परिवार एक दुसरे से मिलते जुलते हैं, हर एक नाखुश परिवार अपने ही किसी कारण से
जवाब सुनकर वह भी रोने लगा कहीं ना कहीं मेरे दर्द में खोने लगा
तुम्हें देखा तो मोहब्बत भी समझ आई, वरना इस लफ्ज़ की तारीफ सिर्फ ही सुना करता था मैं !
दर्द, गम, डर जो भी है बस तेरे अंदर हैं, खुद के बनाये पिंजरे से निकल कर देख, तू भी एक सिकंदर हैं!
जब इंसान तन्हा चलना सीख जाता है तब वो दुनिया को समझ चुका
दर्द की दवा न हो, तो दर्द को ही दवा समझ लेना चाहिए…
कितना अजीब भ्रम है ये मानना कि सुन्दरता
हम सभी को दो में से एक दर्द से पीड़ित होना चाहिए अनुशासन का दर्द या पछतावे का दर्द। अंतर यह है कि अनुशासन का वज़न ज़्यादा होता है जबकि अफसोस का वज़न बहुत ज़्यादा होता है।
जिसका दिल ग़म की तन्हाइयों में उजड़ गया हो, वो बाहर से कितना ही सेहतमंद लगता हो
हसने वालो के साथ तो दुनिया हसती है लेकिन रोने वाला अकेले ही