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मैंने कुछ वक्त चुप रहकर भी देख लिया, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता
यदि मनुष्य कुछ सीखना चाहे, तो उसकी प्रत्येक भूल कुछ न कुछ सीखा देती है ।
भाग्य तो आजकल सब बनाते है पर, अपना परिवार कोई कोई बना पाता है
माना दूरियां कुछ बढ़ सी गई है, मगर तेरे हिस्से का वक्त हम आज भी तनहा गुजरते हैं
है जिनके_पास अपने वो अपनों से #झगड़ते है, नहीं #जिनका कोई अपना वो अपनों को ‘तरसते’ है.
वक्त के साथ-साथ बहुत कुछ बदल जाता है, लोग भी और रास्ते भी अहसास भी!
जिंदगी में अगर बुरा वक्त नहीं आता तो अपनों में छुपे हुए गैर और गैरों में छुपे हुए अपनों का कभी पता न चलती
मुझे दोस्ती करनी हैं इस वक़्त के साथ
ए दिल अब तो होश मैं आ. यहाँ तुझे कोई अपना कहता ही नहीं. और तू है की खामख्वा किसी का बनने पे तुला ।
पैसा कमाने के लिए इतना वक़्त खर्च न करो कि पैसे को खर्च करने के लिए जिंदगी में ही वक़्त ही न मिले ।