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अपना गिरवी रखो, जब तक आपकी वजह से मंज़िल न मिल जाए।
आँसुओ का कोई वज़न नहीं होता, लेकिन निकल जाने पर मन हल्का हो जाता है
अपनी पीड़ा के लिए संसार को दोष मत दो, अपने मन को समझाओ तुम्हारे मन का परिवर्तन ही तुम्हारे दुखो का अंत है।
जिनके उपर जिम्मेदारियों का बोझ होता है उनके पास रूठने और टूटने का वक्त नहीं होता है
मन में चल रहे युद्ध को विराम दे खामख्वाह खुद से लड़ने की कोशिश न कर
वही जीतता है जो समय का साथ देता है।
कर्मणयेवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
चार युगों में सिमटी श्रृष्टि, चार पहर का सन्नाटा है बहन तुम्हारे कदमों में बैठ, मन मेरा निश्चल हो जाता है-मयंक विश्नोई
कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है।
सबसे बड़ा रोग, खुद को बड़ा समझने का है।