#Hindi Quote

अपनी पीठ से निकले खंजरों को जब गिना मैंने, ठीक उतने ही निकले जितनो को गले लगाया था मैंने

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लोग जो अपनी जिन्दगी का नियंत्रण अपने हाथो में नहीं लेते उनका नियंत्रण समय के हाथो में चला जाता है
न कर फ़िक्र की जमाना क्या सोचेगा, ज़माने को अपनी ही फ़िक्र से फुरसत कहाँ!
नाज़ुक लगते थे जो लोग, वास्ता पड़ा तो पत्थर के निकले
कभी कभी वो दौर भी आता है ज़िंदगी में, जब आपको अपनी पसंद से भी नफरत हो जाती है।
आप चाहें जिस भी वस्तु की इच्छा करो, वह आपको आपके अपेक्षित रूप में नहीं मिलेगी. – हारुकि मुराकामी
न जाने किस दरबार का चिराग़ हूँ मैं , जिसका दिल करता है जलाकर छोड़ देता है
जिसने कभी विपत्तियां नही देखी, उसे अपनी ताकत का कभी एहसास नही होगा।
किसी को उजाड़ कर बसे तो क्या बसे किसी को रुलाकर हँसे तो क्या हँसे
ये दिन भी क़यामत की तरह गुज़रा है न जाने क्या बात थी हर बात पर रोना आया
ज़िन्दगी मे सबसे बड़ा धनवान वो इंसान होता हैं , जो दुसरो को अपनी मुस्कुराहट देकर उनका दिल जीत लेता हैं.