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एक पतंग की तरह उड़ना सीखो, जो उड़ती तो आजाद है लेकिन संस्कारों की डोरी साथ लेकर।
मैं उस दरख्त की तरह हूं जिसके पत्ते रोज गिरकर जमीन पर बिखर जाते हैं, लेकिन वह हवाओं से अपना रिश्ता कभी नहीं बदलता।
सुकून ढूंढना है तो खुद में ढूंढो, लोगों में ढूंढोगे तो बेचैन रहोगे
सूरज और चांद की ख्वाहिश नहीं मुझे, जहां दिल को सुकून मिले वहीं मेरे खुदा का दर है।
मैं गलत हो सकता सकती हूं, लेकिन नकारा नहीं। खराब घड़ी भी दिन में एक बार सही समय बताती है।
मेरे ग़म का छोटा सा हिस्सा लेकर तो देखो , मरने की ख्वाहिश न करने लगे तो कहना
लोग गिरे हुए मकानों की ईंटें तक चुरा ले जाते हैं इसलिए अपने हौसलों को कभी गिरने मत दो।
ना चांद की चाहत ना सितारों की फरमाइश, हर जन्म में तू मिले मेरी बस यही ख्वाहिश !
कहते हैं कि दूसरों से हमें एक नजर में भी प्यार हो जाता है। फिर खुद से प्यार का हुनर सीखने में पूरी उम्र क्यों लग जाती है
जो चीज़ किसी ने मेहनत से हासिल की हो, वो आप अपनी ख्वाहिश से हासिल नहीं कर सकते…