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पतझड़ हुए बिना पेड़ों पर नए पत्ते नहीं आते, कठिनाई और संघर्ष सहे बिना अच्छे दिन नही आते.
अपार आशाओं का खेल था सारा, मैंने इस खेल को समझा और देखते ही देखते जीत मेरी ही हुई ।
यही जज्बा रहा तो मुश्किलों का हल भी निकलेगा, जमीं बंजर हुई तो क्या वहीं से जल भी निकलेगा, ना हो मायूस ना घबरा अंधेरों से मेरे साथी, इन्हीं रातों के दामन से सुनहरा कल भी निकलेगा
अजीब दस्तूर है ज़माने का, अच्छी यादें पेनड्राइव में और बुरी यादें दिल में रखते है
किसी के पैरों में गिरकर कामयाबी पाने से बेहतर है अपने पैरों पर चलकर कुछ बनने की ठान लो
लूट लेते हैं अपने ही, वरना गैरों को कहा पता, इस दिल की दीवार कहाँ से कमज़ोर हैं
जिंदगी बस एक खेल ही तो है चाहे तो अच्छे खिलाड़ी बन जाओ या फिर बस एक खिलौना।
जबतक शिक्षा का मकसद नौकरी पाना होगा, तब तक समाज में नौकर ही पैदा होंगे, मालिक नहीं
मैं वो खेल नहीं खेलता जिसमे जीतना फिक्स हो, क्योंकि जीतने का मजा तब हैं जब हारने का रिस्क हो!
जित और हार आपकी सोच पर निर्भर करती हैं, मान लो तो हार होगी और ठान लो तो जित होगी