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ज़िन्दगी में अगर गुलाब की तरह खिलना है तो कांटों से तालमेल की कला को सीखना ही होगा

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ज़िन्दगी एक ढलती शाम की तरह है, जिसमें कहीं उथल-पुथल है, तो कहीं थोड़ा आराम भी।
हद से ज्यादा खुशी और हद से ज्यादा गम, कभी किसी को मत बताओ क्योंकि ज़िन्दगी में लोग हद से ज्यादा खुशी पर नजर और हद से ज्यादा गम पर नमक जरूर लगाते है।
हम ज़िन्दगी भर जमीनों की कीमत पर इतराते रहे, हवा ने अपनी औकात मांगी तो खरीदी हुई ज़मीने बिक गयी।
ज़िन्दगी में अगर गुलाब की तरह खिलना है तो कांटों से तालमेल की कला को सीखना ही होगा।
आप अपने भविष्य तो नहीं लेकिन जीने का तरीका जरुर बदल सकते हो
जिसके पास उम्मीद और आस है, वो ज़िन्दगी के हर इम्तिहान में पास हैं…!
लगातार चलने का नाम ज़िन्दगी है, रुकने-थकने या हार जाने का नहीं। सोने से तो बस नींद पूरा होती है, सपनों को पूरा करने के लिए तो जागना पड़ता है.
ज़िन्दगी पल-पल ढलती है, जैसे रेत मुठ्ठी से फिसलती है कुछ खोकर पछताना क्यों, ज़िंदगी जैसी भी है बस एक ही बार मिलती है।
लगातार चलने का नाम ज़िन्दगी है, रुकने-थकने या हार जाने का नहीं। सोने से तो बस नींद पूरा होती है सपनों को पूरा करने के लिए तो जागना पड़ता है।
ज़िन्दगी बदलने के लिए लड़ना पड़ता हैं, और आसान करने के लिए समझना पड़ता हैं…