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मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

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समझ नहीं आता किस पर भरोसा करू,
सबकुछ कुछ नहीं से शुरू हुआ
उम्मीद छोड़ी हैं तुमसे मोहब्बत नहीं.
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
आप किस कुल, परिवार में जन्मे हो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। आपको बस दूसरों से हटकर अपनी राह बनानी होती है।
न जी भर के देखा न कुछ बात की बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
व्यक्ति कर्मों में जीता है वर्षों में नहीं
अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
हर चमकती हुई चीज़ सोना नहीं होती।
जिसने भी किया है कुछ बड़ा वो कभी किसी से नहीं डरा I