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जमाने में वही लोग हम पर उंगली उठाते हैं जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती

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अगर आपने सफर शुरू कर ही दिया है तो बीच रास्ते से लौटने का कोई फायदा नहीं होगा, क्योंकि वापस आने में जितनी दूरी तय होगी क्या पता मंजिल उससे भी पास हो.
जो समस्याएं तुम्हें सताने लगे, कोई तुम पर उंगली उठाने लगे डरना नहीं-घबराना नहीं, बहन एक बार बढ़े क़दम को पीछे हटाना नहीं-मयंक विश्नोई
सपनों को सच करने से पहले सपनों को ध्यान से देखना होता है.।
ज़िंदगी” की “तपिश” को “सहन” किजिए “जनाब”, अक्सर वे “पौधे” “मुरझा” जाते हैं, जिनकी “परवरिश” “छाया” में होती हैं।
मैदान से हारा हुआ इंसान तो फिर से जीत सकता है, लेकिन मन से हारा हुआ इंसान कभी नहीं जीत सकता इसलिए मन से कभी हार मत मानना..
जीवन में गिरना भी अच्छा है, औकात का पता चलता है, बढ़ते हैं जब हाथ उठाने को, तो अपनों का पता चलता है.
जमाने में वही लोग हम पर उंगली उठाते हैं जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती।
कपड़ों की “मैचिंग” बिठाने से, सिर्फ शरीर “सुंदर” दिखेगा। रिश्तों व हालातों से, “मैचिंग” बिठा लीजिये पूरा जीवन सुंदर हो जाएगा।
मुनाफा का तो पता नहीं लेकिन बेचने वाले तो यादों को भी कारोबार बना कर बेच देते है.
महानता वह नहीं होती कि आप गिर गए और उठे ही ना महानता उसे कहते हैं जवाब गिरकर बार-बार उठते हैं.