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दोस्ती का कोई मज़हब नहीं होता।
अगर आप अपने लिए एक बेहतर दुनिया बनाने की चाह रखते हैं, तो सबसे पहले आपको खुद पर विश्वास रख अपने से प्यार करना होगा।
जीवन में दोस्त तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन भाई हर समय के उपलब्ध है।
कितना मुश्किल होता है उस शख्स को मनाना, जो रूठा भी ना हो और बात भी ना करे।
अक़्ल कहती है दोबारा आज़माना जहल है दिल ये कहता है फ़रेब-ए-दोस्त खाते जाइए
चलो अब जाने भी दो क्या करोगे दास्ताँ सुनकर, ख़ामोशी तुम समझोगे नहीं और बयाँ हमसे होगा नहीं।
परिवार और दोस्त छिपे हुए ख़ज़ाने हैं, जो तकलीफ या परेशानी में सबसे पहले सामने आते हैं।
बहुत मजबूत हो जाते है वो लोग, जिनके पास खोने को कुछ नहीं बचता।
चले जायेंगे तुझे तेरे हाल पर छोड़कर, कदर क्या होती है ये तुझे वक्त सिखा देगा।
मजबूत बनो मेरे दोस्त, ये दुनिया किसी पर रहम नहीं करती