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ज्यादातर लोगों के लिए, प्रेम का मतलब होता है, ‘तुम्हें वही करना चाहिए, जो मैं चाहता हूं।’ नहीं, प्रेम का असली मतलब है कि वे जो चाहें कर सकते हैं, और हम फिर भी उन्हें प्रेम करते हैं।
प्रेम कोई काम नहीं बल्कि एक गुण है ।
प्रेम एक समाहित करने की प्रक्रिया है। जब एक बार आपको मैं अपने एक अंश के रूप में शामिल कर लेता हूं, मैं आपके साथ वैसा ही होऊंगा, जैसा मैं खुद के साथ हूं। - सद्गुरु
प्रेम कोई ऐसी चीज नहीं हैए जो आप करते हैंए बल्कि जो आप स्वयं हैं।
जिस व्यक्ति के अंदर स्वयं को खोने का डर नहीं है, जो इससे मुक्त हो चुका है, वही प्रेम को जान सकता है, वही प्रेम बन सकता है ।
अगर कोई आपको इसलिए प्यार करता है कि आप उनके हैं, तो यह प्यार इसलिए है क्योंकि वे आपको अपनी संपत्ति मानते हैं। अगर इस बात के लिए कोई आपसे प्यार करता है, कि आप कौन हैं, तो आप भाग्यशाली हैं ।
प्रेम का झरना अनवरत बहता है, उसकी धारा में बहकर देखो कितनी खुशियां मिलतीं हैं। प्यार के सागर में डूबोगे तो मनचाहा पाओगे।
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय। बलिहारी गुरु आपन, गोविंद दियो बताय।
निपुणता हमेशा आपके आसपास के लोगों के प्रति आपके प्रेम और परवाह का नतीजा होनी चाहिए - न कि एक मशीनी और उदासीन कार्य-भावना का ।
भाइयों में प्रेम होगा तो लोगों को परेशानी होगी।