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आकाश में जितने भी तारे हैं या कि वह प्रतिबिंब हमारे हैं बगिया है जैसे बहना की तरह, जिसने फूल दिए कई सारे हैं।

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स्वयं के प्रति संतोष दूसरे के प्रति दया, इन्हीं दो पंखों से जीवन के आकाश को छु सकते
जो मैं जलते चिराग में पड़ा तेल हूँ, तो सच यह है कि बहना तुम उस चिराग में जलती बाती हो ।
आप इन्हीं दो पंखों से जीवन के आकाश में ऊँचा उड़ सकते हैं।
आकाश में जितने भी तारे हैं या कि वह प्रतिबिंब हमारे हैं बगिया है जैसे बहना की तरह, जिसने फूल दिए कई सारे हैं।
तुम संघर्ष के समय बनी ऐसी प्रतिमा हो बहना, जिसे न्याय की मूर्ति कहना गलत ना होगा ।
तेरे होने से ही मेरे घर परिवार में खुशियां हैं क्योंकि बहना तू मुझे मिला खुशियों का वरदान है।
आकाश के सभी तारे हमारा प्रतिबिम्ब हैं बगीचा एक बहन की तरह है, जिसने बहुत सारे फूल दिए हैं।
मेरी बहन ही तो है जो रोज मेरा हाल कुछ इस अंदाज़ में पूछती है मेरे सवालों पर हंसती है और मेरी फ़िक्र में सुबह-शाम झूझती है
मेरे भीतर पनपे विश्वास की जड़ तुम हो बहना, मेरी जीत का एकलौता श्रेय तुम हो बहना
सुन बहन आँखों की चमक कभी कम मत होने देना जो होता हो हो जाए, तू हंसती आँखों को मत रोने देना