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रात नही होगी तो सुबह का महत्व नही होगा, दिख के बादल नही आएंगे तो सुख का अनुभव ही नही होगा।
केवल शारीरिक धमकियाँ ही दी जा सकती हैं। जब भौतिक से परे का आयाम आपके लिए एक जीवंत अनुभव बन जाता है, तो कोई डर नहीं रहता।
इंसान का सारा ध्यान आज बस इस बात पर है कि ज़िंदगी जीने के तरीकों में कैसे सुधार किया जाए।
जो बनाए हमें इंसान और दे सही-गलत की पहचान देश के उन निर्माताओं को हम करते हैं शत-शत प्रणाम! हैप्पी टीचर्स डे!
खुद पर काबु रखना एक परिपक्व इंसान की निशानी है; वक्त से पहले खुद पर काबु खो देना अपरिपक्वता की पहचान है।
भरोसा तो खैर सांसों का नहीं होता, और लोग इंसान पर कर लेते है।
शब्द ही इंसान का आइना होते हैं, शक्ल तो उम्र और समय के साथ बदल जाती है
अगर एक हारा हुआ इंसान हारने के बाद भी मुस्कूरा दें.तो जितने वाला भी जीत की खुशी खो देता है।
कभी तो चौक के देखे कोई इंसान तरफ, किसी की आंख में हमको भी इंतजार दिखे ।
जब इंसान अन्दर से टूटता है तो बहार से खामोश हो जाता