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प्रेम तो खुद का पूर्ण समर्पण है इसमें ईगो और अनादर का कोई स्थान नहीं होता.
मुझे खुद पर इतना भरोसा है कि यह दिल हजारों के बीच रहकर भी सिर्फ आपका रहेगा.
कुछ लोग खोने को प्यार कहते हैं, तो कुछ पाने को प्यार कहते हैं, पर हकीक़त तो ये है, हम तो बस निभाने को प्यार कहते हैं.
क्यां हुआ जो हम अब अजनबी बन गए, इतनी जल्दी दूरियाँ बढ़ गई
ख़ुशी, शांति और प्रेम – ये कोई आध्यात्मिक लक्ष्य नहीं हैं। यह सब तो समझदारीपूर्वक जीने की शुरुआत है ।
प्रेम कोई सहूलियत का साधन नहीं है। यह खुद को मिटाने की एक प्रक्रिया है ।
तुमसे मिलकर बात करके जो खुशी होती ह वह खुशी आज तक किसी से मुझे नसीब नहीं हुई
आपके प्यार करने की, लोगों तक पहुँचने की, जीवन को अनुभव करने की क्षमता की कोई सीमा नहीं है। सीमाएँ सिर्फ शरीर और मन की होती हैं ।
तेरा इंतजार करता हूँ रोज रातों में, खुद को सांसों में समेटा हुआ देखता हूँ
इंतज़ार करने वालों को सिर्फ़ उतना ही मिलता है जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं।