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संभल कर चल नादान ये इंसानों की बस्ती है, ये खुदा को भी आजमा लेते है, फिर तेरी क्या हस्ती है..!!!

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वो छोटी छोटी उड़ानों पर गुरुर नहीं करता, जो परिंदा अपने लिए आसमान ढूंढता है..!!!
मिला वो मुझे हर जगह, मिला ना हाथो की लकीरों में..!!!
अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
नई जिंदगी शुरू करने के लिए हमेशा पन्ने पलटना काफ़ी नहीं होता, कभी कभी किताब भी बदलनी पड़ती है…!!!
हजारों मुकम्मल ख्वाबों के बीच, तेरा ना मिलना खलता बहुत है..!!!
आज खुदा ने मुझसे कहा भुला क्यों नहीं देते उसे मैंने कहा इतनी फिक्र है तो मिला क्यों नहीं देते !
मैं हर रात कुछ इस क़दर बिखरता हु, की मुझे समेटने के लिए ये रात सदियों में गुजरती है..!!!
नहीं बदल सकते हम खुदको औरों के हिसाब से, एक लिबास मुझे भी दिया है, खुदा ने अपने हिसाब ।
तुम कहा हो मेरे करीब आओ, मैं कहा हु मुझे पता तो चले..!!!
अगर कोई जोर देकर पूछेगा हमारी मोहब्बत की कहानी, तो हम भी धीरे से कहेंगे की मुलाकात को तरस गए.!!!