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नाज़ुक लगते थे जो लोग, वास्ता पड़ा तो पत्थर के निकले
मुझे दोस्ती करनी हैं इस वक़्त के साथ
अब मत खोलना, मेरी ज़िन्दगी की पुरानी किताबो को, जो था वो मैं रहा नहीं, जो हूँ वो किसी को पता नहीं
दर्द मुझको ढूंढ़ लेता है रोज़ नए बहाने से वो हो गया वाक़िफ़ मेरे हर ठिकाने से
ज़िन्दगी में कुछ ज़ख्म ऐसे होते है जो कभी नहीं भरते बस इंसान उन्हें छुपाने का हुनर सीख जाता है
अपनी जिंदगी मे हर किसी को अहमियत दीजिये क्योकि जो अच्छे होंगे वो साथ देंगे और जो बुरे होंगे वो सबक देंगे।
किताबों से बढ़कर सच्चा दोस्त और कोई नहीं हो सकता। यह आपके सुख-दुख तथा जीवन के हर पड़ाव में आपका साथ देता है।
सूरज और चांद की ख्वाहिश नहीं मुझे, जहां दिल को सुकून मिले वहीं मेरे खुदा का दर है।
छोटी सी बात पर खुश होना मुझे आता था, पर बड़ी बात पर चुप रहना जिंदगी ने सीखा दिया!
बहुत अंदर तक तबाह कर देते हैं वो अश्क़ जो आँखों से गिर नहीं पाते।