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इतनी भी चालाकी अच्छी नहीं , कि तुम भगवान को सुख में नहीं बस दुःख में याद करते हो।
उम्मीद की बस एक किरण ही काफी है , आपकी आँखों में आयी नमी को सुखाने के लिए।
विश्व एक विशाल व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।
तोड़े से भी ना टूटे, यह ऐसा बंधन है। इस बंधन को सारी दुनिया कहती रक्षाबंधन है। बहुत मजबूत होती है रेशमी धागे की ये पावन डोर, जीवनभर बांधे रखती है भाई- बहन के स्नेह की डोर।
मजबूत बनो मेरे दोस्त, ये दुनिया किसी पर रहम नहीं करती
घर की बाते जब , मोहल्ले में पहुंच जाएंगी तो जमे जमाए घर की नीव तो हिलेगी ही।
पीठ हमेशा मजबूत रखनी चाहिए, क्योंकि शाबाशी और धोखा दोनों पीठ के पीछे ही मिलते है!
खुद पर विश्वास , किसी और से ज़्यादा आपका खुदका होना चाहिए।
पीठ हमेशा मजबूत रखनी चाहिए, क्यूंकि शाबासी और धोखा, दोनों पीछे से ही मिलते हैं
मैले कपडे फिर भी चल जाएंगे , मगर मैला मन लंगड़ा होता है।