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मछलियां भी खुश हो गयी ये जानकर, की आदमी ही आदमी को जाल में फ़साने लगा हैं.

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पूरी दुनिया नफरतों में जल रही है, फिर भी जाने कैसे ठंड लग रही है.
थक कर बैठा हूँ, हार कर नहीं, सिर्फ बाजी हात से निकली हैं, जिंदगी नहीं.
जो अपने क़दमों की काबिलियत पर विश्वास रखते हैं, वही लोग अक्सर मंज़िल पर पहुंचते हैं.
दुनिया चुप रहती कब हैं, कहने दो जो कहती हैं.
मिट्टी का मटका और परिवार की क़ीमत ! सिर्फ बनाने वाले को ही पता होती है, तोड़ने वाले को नहीं.
कल से करेंगे ये शब्द आपको कभी कामयाब नहीं होने देंगे.
आदमी अच्छा था, यह सुनने के लिए, आपको मरना पड़ता है.
बहुत मुश्किल होता है, उस व्यक्ति को हराना जिसे चलना बुरे वक्त ने सिखाया हो.
माफ़ बार बार करों, मगर भरोसा सिर्फ एक बार.
मैं वो खेल नहीं खेलता जिसमे जीतना फिक्स हो, क्योंकि जीतने का मजा तब हैं, जब हारने का रिस्क हो.