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दूसरों को सुनाने के लिऐ अपनी आवाज ऊँची मत करिऐ,बल्कि अपना व्यक्तित्व इतना ऊँचा बनाऐं कि आपको सुनने की लोग मिन्नत करें.

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दूसरों को सुनाने के लिऐ अपनी आवाज ऊँची मत करिऐ, बल्कि अपना व्यक्तित्व इतना ऊँचा बनाऐं
मैं उस दरख्त की तरह हूं, जिसके पत्ते रोज गिरकर जमीन पर बिखर जाते हैं, लेकिन वह हवाओं से अपना रिश्ता कभी नहीं बदलता।
अगर तू चलने के लिए तैयार हो तो, मंजिल तुम्हारे सामने झुकने के लिए तैयार हो जायेगी
खुल जाएंगे सभी रास्ते, रुकावटों से लड़ तो सही सब होगा हासिल, तू जिद्द पर अड़ तो सही।
हुनर तो सब में होता हैं फर्क बस इतना होता हैं किसी का छिप जाता हैं तो किसी का छप जाता हैं
जो अपना दोस्त खुद बन जाता है उसे दोस्तों की दोस्ती की जरूरत ही नहीं रहती।
एक ही मंज़िल तक कई रास्ते जाते हैं, तू रास्ता बदलकर तो देख तू पहुंचेगा ऊंचाइयों तक, दोबारा चलकर तो देख।
शिक्षक का स्थान सबसे ऊंचा, उन्होंने हमें बनाया अद्भुत। बच्चों के मन में रोशनी लाते,उन्हें सही राह दिखाते।
ए दिल अब तो होश मैं आ. यहाँ तुझे कोई अपना कहता ही नहीं. और तू है की खामख्वा किसी का बनने पे तुला ।
वक्त को अपना वक्त बनाने में वक्त लगती है I