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रोज रोज गिरकर भी मुकम्मल खड़ा हूँ, ए मुश्किलों देखो मैं तुमसे कितना बड़ा हूँ

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खुद को व्यस्त नहीं व्यवस्थित कीजिए, सफलता का यह पहला मंत्र है!
सफलता पाने के लिए आत्म-विश्वास जरुरी है, और आत्म-विश्वास के लिए तैयारी!
अगर तू चलने के लिए तैयार हो तो, मंजिल तुम्हारे सामने झुकने के लिए तैयार हो जायेगी
आप तब तक नहीं हार सकते, जब तक आप कोशिश करना नहीं छोड़ देते।
दूसरों को सुनाने के लिऐ अपनी आवाज ऊँची मत करिऐ,बल्कि अपना व्यक्तित्व इतना ऊँचा बनाऐं कि आपको सुनने की लोग मिन्नत करें.
रोज रोज गिरकर भी मुकम्मल खड़ा हूँ, ए मुश्किलों देखो मैं तुमसे कितना बड़ा हूँ।
बस यही दो मसले जिंदगी के हल ना हुए, ना नींद पूरी हुई ना ख्वाब मुकम्मल हुए..!!!
एक ही मंज़िल तक कई रास्ते जाते हैं, तू रास्ता बदलकर तो देख तू पहुंचेगा ऊंचाइयों तक, दोबारा चलकर तो देख।
जिस जिस पर यह जग हंसा है, उसी ने इतिहास रचा है।
विफलता के बारे में चिंता मत करो,आपको बस एक बार ही सही होना हैं.